बूझो तो जानें ---
आमिर खुसरो की तरह संतों ने भी अपनी वाणी में पहेलियाँ लिखी हैं ,जैसे --सोमवार, 20 मई 2013
रविवार, 19 मई 2013
अरविन्द पहेलियाँ
अरविन्द पहेलियाँ
................................
..................................
.....................................
......................................
बतलाओ कौन वह .
जिससे हुआ क्लेश .?
.....................................
.....................................
6 . खचर खचर सुत खचरा है
खचर खचर संग लड़ता है .
खचर खचर को मृत्यु दे .
फिर खचर स्वयं भी मरता है .
.............................................
.............................................
7 , वह आवे तो तपन को लावे
क्षपा उसको रता न भावे .
पतंग बना वह घूम रहा
सबका माथा चूम रहा ..
..........................................
..........................................
8 . बार -बार नैना मटकावे
कान खींच इत उत धावे
कहो कौन वह नित नवेली
सूनी उसके बिना हवेली ....अरविन्द
.......................................
.......................................
अमीर खुसरो के बाद से हिंदी साहित्य में पहेलियाँ लुप्त हो गयी हैं .इस
विषय पर एक विद्यार्थी ने प्रश्न उठाया तो कक्षा में मैने अपनी पहेलियाँ
तत्काल घडीं ..वे उत्तर नहीं दे पाए ....अब आप सबके लिए हैं .....उत्तर
देना मत भूलें ..
मंगलवार, 7 मई 2013
सब का सच
बच्चे थे , तब अच्छे थे .
खाते पीते हँसते थे
खेल खेलते रोते थे
धमा चौकड़ी करते थे .
सब को प्यारे लगते थे .
बच्चे थे , तब अच्छे थे .
विदयालय जब जाते थे
गला फाड़ तब रोते थे .
टीचर गले लगाती थी
बड़ी प्यारी लगाती थी .
उछल कूद ही जीवन था
माँ ही एक खिलौना था .
चूमा चाटी करते थे
सब को न्यारे लगते थे .
बच्चे थे , तब अच्छे थे .
बारिश हमें भिगोती थी
छप छप हमें नहाती थी .
हम कपड़े गंदे करते थे
दो -चार चांटे पड़ते थे .
नित नयी शरारत आती थी
हमें भरपूर नचाती थी .
कुछ झिडके भी हम खाते थे
कुछ मार कुटायी होती थी .
रो -धोकर चुप हो रहते थे
बच्चे थे ,तब अच्छे थे .
अब हम बूढ़े हो रहे हैं
गधे भार को ढ़ो रहे हैं .
चिंता की गठरी लादे
जीवन का रस खो रहे हैं .
आशंकाओं के मकड़ जाल में
मृग तृष्णा को बो रहे हैं .
खुशियाँ हुई तितिलियाँ हैं
उठती हैं, ललचाती हैं
हाथ नहीं आ पाती हैं .
चैन नहीं मिल पाता है
बचपन याद ही आता है
बीत गए दिन सुख के वे
बच्चे थे , तब अच्छे थे .
बड़े हुए अहँकार जगा
नया एक बुखार चढ़ा .
नयी अलामत जाग गयी
ईर्ष्या द्वेष की आग लगी .
चुगलखोरी ही भाती थी
निन्दा अमृत लाती थी .
पाखण्ड सिरों पर नाच गया
सुख शान्ति को दाह लगा .
सब मैं मैं मैं मैं करते थे
दूजे का भाग हड़पते थे .
लालच की लाठी लेकर
कथा झूठ की रचते थे .
बच्चे थे , तब अच्छे थे .
अब वृद्धावस्था आ गयी है
रोग कई जगा गयी है .
नित दवाइयां खाते हैं
और घिसटते जाते हैं .
दम -ख़म सारा लुप्त हुआ
चेतन तत्व विलुप्त हुआ .
क्या खोते और क्या पाते हैं
अभी भी सोच न पाते हैं .
कर्म विपाक का फल बैठा
अपने आप को छल बैठा .
आत्म ग्लानि भाव जगे
बच्चे थे , तब अच्छे थे ............अरविन्द
सोमवार, 6 मई 2013
न पूछ .
मुझसे मेरा हाल न पूछ .
साधारण के जंजाल न पूछ .
संन्यासी ही अब चोर लगे हैं
पाखंडी पूजा की राल न पूछ .
चापलूसों की दुनिया है यह
गुण का यहाँ ख्याल न पूछ .
हर तुक पर वाह वाही चाहें
कविता हुई कंगाल न पूछ .
मंदिर में पत्थर बन बैठा है
भूल गया प्रभु चाल न पूछ .
भांड सभी उपदेशक हो गए
लुट गया सारा माल न पूछ ....अरविन्द
गुरुवार, 2 मई 2013
जीवन न तृप्ति, न प्यास .
जीवन न तृप्ति, न प्यास .
जीवन न मुक्ति न भास् .
जीवन न भुक्ति ,न त्रास .
जीवन अनसुलझी सी आस ,
जीवन न तृप्ति ,न प्यास
जीवन नहीं कोई दौड़ धूप
जीवन नहीं कोई अंध कूप .
जीवन उथला सरवर नाहीं
जीवन है उसकी परछाईं .
जीवन तो है शांत विलास
जीवन न तृप्ति ,न प्यास .
जीवन नाहीं धूप अरु छाया
जीवन नाहीं ताप अरु ताया
जीवन नाहीं भ्रम अरु माया
जीवन नाहीं भूत का साया
जीवन नाहीं भावी अनपाया
जीवन तो है लासोल्लास
जीवन न तृप्ति ,न प्यास .
जीवन को जो दुःख मानते -
जीवन का नहीं सत्य जानते .
अनुभवों की बृहत् श्रृंखला में
अनुभूतियों की वास सुवास .
जीवन न तृप्ति ,न प्यास ....अरविन्द
बुधवार, 1 मई 2013
उसके लिए
साधु की संगत करन की मन में रही हुलार .
न साधु मिला न संग मिला न मिला विचार .ऊँचे चढ़ चढ़ पुकारता अब करूँ कौन उपाय
मैं त्यागूँ अपनी हौं को तू भी त्यागे अपनी तू
बहुतक जीवन अब जी लिए संसार जले धू धू .......अरविन्द
मंगलवार, 30 अप्रैल 2013
गज़ल
दर्दे -दिल की दुवा है गज़ल
समुद्र सी लहराएगी गज़ल .
मेरी मेरी मेरी कब तक करेंगे
सिर्फ तेरी तेरीहै हमारी ग़जल .
हँसना रोना या कल्पना ही नहीं
अपने खोने की चाहत है ग़जल .
बहकने की हमें कोई आदत नहीं
गिरतों का सहारा होती है गज़ल ......अरविन्द
सदस्यता लें
संदेश (Atom)